यदि मेरे पंख होते तो पर निबंध - Yadi Mere Pankh Hote To

 नमस्कार दोस्तों आपका दिल से स्वागत हे तो आज हम बात करने वाले हे की यदि मेरे पंख होते तो? आज हर एक इंसान काल्पनिक सोच से कुछ ना कुछ सोचता ही रहता हे तो हर एक इंसान के मन में ऐसा विचार एक बार जरूर आया होगा की काश मेरे पास भी पंख होते? और ऐसा विचार ज्यादातर हमें बचपन के दौरान ही आता हे तो दोस्तों आज हम इसी विषय पर बात करने वाले हे की काश मेरे पास भी पंख होते तो? तो दोस्तों मुझे उम्मीद हे की आपको ये निबंध जरूर पसंद होगा। पक्षी नहीं होंगे तो क्या होगा?

यदि मेरे पंख होते तो पर निबंध


यदि मेरे पंख होते तो?

[ प्रस्तावना - लोग मेरे बारे में क्या कहते - पंख होने के कई लाभ -  मुझे सेवा का अवसर भी मिलता - दो पैर ही अच्छे ]

प्रस्तावना 

हर एक इंसान ने आकाश में पक्षियों को उड़ते हुए देखा ही होगा उन्हें देखकर हमारे मन भी ऐसा ख्याल जरूर आता होता की काश मेरे पास भी पंख होते तो में भी आकाश में उड़ सकता। जहा जाना चाहता वहाँ तेज़ गति से उड़कर चला जाता यानिकि में धरती के बंधन से मुक्त होकर खुल्ले आकाश में अपनी इच्छा अनुसार सैर करता। मुझे उड़ने में बहुत आनंद मिलता। 

लोग मेरे बारे में क्या कहते

यदि मेरे पंख होते तो सबसे पहले मुझे लोग एक अनोखा लड़का कहते क्योकि मेरे पास ही पक्षी की तरह पंख होते जबकि कई लोग तो मुझे पंखवाला लड़का , जादुई लड़का आदि नामो से पहचानते। में जहा भी जाता वहां सब मुझे अचरज से देखते और मुझे देखकर वो भी सोचते की काश इस लडके की तरह मेरे पास भी पंख होते? अखबारों में टीवी चैनलों में मेरी फोटो छपती इतना ही नहीं कई लोग मेरे पास आकर सेल्फी भी खींचते। में जहाँ भी जाता मेरे आसपास भीड़ हो जाती मुझे सवाल करती की तुम्हारे पास ये दो पंख कैसे आये? क्या तुम हमें अपने साथ लेकर भी उड़ सकते हो क्या ? तरह - तरह के सवाल लोग मुझे करते। 

पंख होने के कई लाभ

अगर मेरे पास पंख होते तो में आराम से इधर उधर घूम फिर सकता यानिकि जहाँ मुझे जाने की इच्छा होती में वहाँ पहुंच जाता ना मुझे किसी स्कूटर की ना किसी गाड़ी की ना किसी बस की कोई जरुरत पड़ती ना किसी को पैसा देना पड़ता बस में उड़कर वहां चला जाता। ना मुझे प्रट्रोल की जरुरत होती ना ही डीजल की। मुझे किसी भी जगह पर जाने के लिए मुझे कोई भी ट्रैफिक रोक नहीं सकता चाहे कितनी ही भीड़ क्यों न हो लेकिन कोई मुझे रोक नहीं सकता। यानिकि पंख होने की वजह में कही भी जा सकता हु। मकरसंक्रांति के त्यौहार पर पतंगों की ढेर लग जाती। जब भी मेरी माँ बाजार से कुछ मंगाती में उसे जल्दी से ले आता। 

    में आकाश में तेज रफ़्तार से उड़ने की कोशिश करता पक्षियों के साथ उड़ने की हरिफाई करता जहा भी मुझे मीठे फल के पेड़ देखने को मिलते में वहाँ जाकर मीठे फल खाता। पेड़ो पर आराम करता और रात के दौरान अपने घर पहुँच जाता और कभी - कभी रात को उड़ने की इच्छा होती तो रात के दौरान भी आकाश में उड़ता। महासागरों के ऊपर उड़ने का मज़ा ही कुछ और होता। बड़े बड़े जंगलो की सैर करता सेर बाघ जैसे खूंखार प्राणियों को देखता वो कैसे शिकार करते हे ये उड़ते हुए देखता ना किसी का डर बस मुझे आकाश में उड़ने वाले विमानों से जरूर ख़तरा रहता और किसी से नहीं। 

मुझे सेवा का अवसर भी मिलता 

अगर मेरे पास पंख होते तो मुझे सेवा करने के बहुत अवसर मिलते जैसे की में आग में फसे लोगो को बहार निकालने में मदद करता। दुर्घटना में घायलों की मदद करने के लिए फ़ौरन पहुंच जाता। अगर किसी का अकस्मात हो जाता हे तो में तुरंत ही उसे अस्पताल में भरती करावाता। अगर कोई भी नदी या तालाब में डूब रहा हे तो उसकी मदद करता। बच्चों और बूढ़ो की मदद करने में देर ना करता। 

दो पैर ही अच्छे 

भगवान जो करता हे वो हमारे और सबके लिए अच्छा ही करता हे इसलिए पंखो से हमारे पास जो दो पैर हे वो ही हमारे लिए हमारे पंख हे ये तो हमने अच्छी बाते आपको बताई की अगर आप सोचिये की पंख होने से जितना लाभ हो उतना नुकशान भी हो सकता हे क्योकि हर एक इंसान अच्छा नहीं होता इसलिए हमारे पैर ही हमारे लिए पंख हे।

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" पढ़ने के लिए आपका दिल से धन्यवाद "

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