साधु और बिच्छू की प्रेरणादायी कहानी

हेल्लो दोस्तों कई कहानीया ऐसे होती हे जो हमें ज़िन्दगी में बहुत कुछ सीखा देती हे यानिकि कहानी से हम बहुत कुछ सिख सकते हे जैसे की हमें ज़िन्दगी कैसे जिनि चाहिए ,ज़िन्दगी में हम आगे कैसे बढे आदि बातें हम कहानी के माध्यम से सिख सकते हे तो आज हम एक ऐसी प्रेरणादायी कहानी के बारे में बात करने वाले हे जिसे हमें दुसरो के प्रति कैसे ज़िन्दगी जिनि चाहिए ये सिख सकते हे तो दोस्तों मुझे उम्मीद हे की आपको ये पोस्ट जरूर पसंद होगी।

साधु और बिच्छू की प्रेरणादायक कहानी

" कोई हमारे लिए बुरा हो सकता हे लेकिन हम तो उसके लिए अच्छे साबित हो सकते हे "

साधु और बिच्छू की कहानी 

एक बार की बात हे एक दिन एक साधु अपने कुछ काम के लिए दूसरे गांव जा रहे थे तब अचानक बारिश हुई साधु अपने आपको बचाने के लिए पेड़ के निचे चले गए कुछ देर के बाद बारिश बंध हो गई मगर उसका पानी इधर उधर भरा हुआ था तब अचानक से उस साधु की नज़र एक बिच्छू पर पर जा पड़ी वो कीचड़ में पूरी तरह से फसा हुआ था और उस कीचड़ से बहार निकलने की कोशिश करता था ये देखकर उस साधु ने कुछ भी सोचे बिना उस बिच्छू को कीचड़ में से बहार निकालने के लिए अपना हाथ लम्बा किया और उसे पकड़कर बहार निकाला लेकिन क्या होना था उस बिच्छू ने साधु को काट लिया क्या आप भी ऐसा करते ये बात उस संत को भली भाती पता थी की अगर वो उसे कीचड़ में से बिच्छू को बहार निकालेंगे तो बिच्छू उसे ही काट लेगा, मुझे बहुत दर्द होगा। लेकिन फिर भी उन्होंने बिच्छू को बहार निकाला यानिकि साधु ने अपना कर्म किया जो उनको करना चाहिए और बिच्छू ने भी अपना कर्म किया जो उसे करना चाहिए।

सिख : छोटी सी कहानी हे लेकिन बहुत बड़ी सिख देती हे की इंसान को अपनी इंसानियत नहीं भूलनी चाहिए चाहे उसके लिए हमारा नुकशान ही क्यों न हो। साधु का काम होता हे दुसरो की मदद करना वैसे ही बिच्छू का काम होता हे कांटना यानिकि साधु ने भी बिच्छू की मदद करके अपना फर्ज निभाया और बिच्छू ने भी यानिकि कोई हमारे लिए बुरा हो सकता हे लेकिन हम तो उसके लिए अच्छे साबित हो सकते हे। कोई हमारे साथ चाहे कितना भी बुरा क्यों न करे लेकिन हमें उनके जैसा नहीं होता हे क्योकि कोई हमारे साथ बुरा करे ये उनका कर्म हे लेकिन हम किसी के साथ बुरा न करे ये तो हमारा धर्म हे।

हमें भी अपनी कठिन परिस्थिति में अपनी अच्छाई को नहीं छोड़ना चाहिए। 

" पढ़ने के लिए आपका दिल से धन्यवाद "

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