दूरियों पर शायरी – Duriyo Par Shayari In Hindi

दूरियों पर शायरी 
दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

कोई दोस्त पुराना नहीं होता 

कुछ दिन बात न करने से बेगाना नहीं होता 

दोस्ती में तो दुरी आती रहती हे लेकिन 

दूरियों का मतलब भुलाना नहीं होता। 

 

आप खुद नहीं जानती आप कितनी प्यारी हो 

जान हो हमारी लेकिन जान से प्यारी हो 

दूरियों के होने से हमें कुछ फर्क नहीं पड़ता क्योकि 

आप कल भी हमारी थी और आज भी हमारी हो। 

 

वो करीब तो बहुत हे लेकिन 

कुछ मजबूरियों के साथ  

हम दोनों जी तो रहे हे पर 

बहुत सी मज़बूरीयो के साथ। 

 

माना की दूरिया कुछ हद से 

बढ़ गई हे लेकिन 

तेरे हिस्से का वक्त 

आज भी तन्हा ही गुजरता हे।

 

मुझसे नहीं सहा जाता दूरियों का ये दर्द,

तुम लौट कर घर वापस चले क्यूँ नहीं आते,

मुझे पता है शिकायत तो तुझे बहुत सी है,

पर तेरे बिन मुझसे अब रहा नहीं जाता।

 

दूरियों से ही तो एहसास होता है,

की नज़दीकयां कितनी खास होती है।

 

तुम भी सबर रख दूरियों का मलाल

उसे भी होगा,

जब तुम किसी और का ख़ास होगा

तो मोहब्बत का एहसास उसे भी होगा।

 

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

जो भी इश्क दूरियों में बरकरार रहे,

वो इश्क ही कुछ और होता है।

 

पास रह कर ही दूरियां बहुत है,

मगर इतना समझ लो,

कोई खास नहीं होता,

तुम इस कदर पास हो मेरे दिल के,

मुझे दूरियों का एहसास नहीं होता।

 

ग़म नहीं दूरियों का अगर फासले

दिल में न हो,

नजदीकियां बेकार है अगर जगह

दिल में ना हो।

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

मेरी जान रूठते हे सब एक दूसरे से,

दूरियों कोई भी दिल ज्यादा दिन

सह नहीं पाता।

 

दूरियों चाहें कितनी भी क्यों ना हो,

आप ही दिल में हो दूसरा कोई नहीं,

तुम्हे जानता हूं अच्छे से याद करते तो हो,

पर दिल की बात बताते कोई नहीं।

 

कोई फर्क नहीं पड़ता दूरियों से,

बात तो दिलों की नजदीकियों से होती है,

दोस्ती तो कुछ आप जैसों से है,

वरना मुलाक़ात तो जाने कितनों से होती है।

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

की मुझसे दूरियां बनाकर तो देखो,

फिर पता चलेगा कितना नजदीक हूं मै।

 

दूरियां ही नजदीक लाती है,

दूरियां ही एक दूजे की याद दिलाती है,

दूर होकर भी कोई करीब है कितना,

दूरियां ही इस बात का एहसास दिलाती है।

लव शायरी 

 

तेरी दूरियों में वो दम कहा,

जो मेरी चाहत को कम कर दे।

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

आप खुद नहीं जानते आप कितने प्यारे हो,

जान हो हमारी पर जान से भी प्यारे हो,

दूरियों के होने से कोई फर्क नहीं पड़ता,

आप कल भी हमारे थे और आज भी हमारे हो।

 

अगर दूरियों से फर्क ना पड़े तो,

समझ लेना बहुत नजदीक हो तुम।

 

दूरियों का अहसास तब हुआ,

जब मैंने कहा मैं ठीक हूं और उसने

मान लिया।

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

तुम पास नहीं तो क्या हुआ,

मोहब्बत तो हम तेरी दूरियों से भी

करते है।

 

जब कोई अपना गैरो जैसा व्यवहार

करने लग जाए,

तब दूरियों का एहसास अपने आप

होने लगता है।

 

तू पास नहीं हो तो क्या हुआ,

मोहब्बत तो हम तेरी दूरियों से भी

करते है।

 

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

दूरियों से ही एहसास होता है,

की नजदीकियां कितनी खास होती है।

 

दूरियों की न परवाह कीजिए,

दिल जब भी पुकारे हमें बुला लीजिए,

हम ज्याद दूर नहीं आपसे

बस अपनी आँखों को पलकों से मिला

लीजिए।

 

इस दूरियों को जुदाई मत कहना,

इस खामोशियों को रुसवाई मत कहना,

हर मोड़ पर याद करेंगे आपको

जिंदगी में साथ नहीं दिया तो बेवफाई

मत कहना।

 

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

दूरियों से दर्द नहीं होता जनाब

दर्द तब होता है जब कोई पास हो कर भी

खामोश होता है।

उम्मीद पर शायरी 

 

एक सिल सिले की उम्मीद थी जिनसे,

वही फासले बनाते गये,

हम तो पास आने की कोशिश में थे

ना जाने क्यूं वो हमसे दूरियों बढ़ाते गये।

 

दूरिया तो बढ़ा ली हमने पर तुम्हारी

यादों का क्या करें।

 

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

तुझसे दूरियों का एहसास सताने लगा,

तेरे साथ गुजरा हर पल याद आने लगा,

जब भी कोशिश की तुझे भूलने की

तुम और ज्यादा दिल के करीब आने लगा।

 

जिनको खुद से ज्यादा अपना समझा,

वो हमसे दूरिया बनाए बैठे है,

हमें कोई भी सजा देदो,

आपकी सजा पाने के लिए तैयार बैठे है।

 

मोहब्बत की हवा जिस्म की दवा बन गयी,

दूरियां आपकी मेरी चाहत की सजा बन गयी,

कैसे भूलूं आपको एक पल के लिए

आपकी याद हमारे जीने की वजह बन गयी।

दूरियों पर शायरी - Duriyo Par Shayari In Hindi

 

जिनकी याद में आती रही है हिचकियां

वो बढ़ाते जा रहे है दूरियों पर दूरियां

बेवफाई थी मेरी केवल उसी के वास्ते

बेवफाई के सदा देता रहा है जो निशां।

 

इन दूरियों को मैंने घुटनों पर ला दिया,

क्योकि आज भी तुम दिलमे शुमार हो

एक ख्याल क्यों न आए बीते दिनों का

क्योकि एतबार में फिरसे इजहार हो।

 

मुसलसल दूरियों की तू परवाह न कर,

तेरी दी हुई हंसी मैं अब भी पहनता।